ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: शनिवार को दिल्ली पुलिस ने कहा कि, उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की हिंसा में शामिल होने के संदेह में दो और लोगों से संपर्क किया है और उन्हें उनके सामने पेश होने और जांच में शामिल होने के लिए कहा है। पुलिस का कहना है कि, दो व्यक्तियों रोहित और अक्षत अवस्थी की पहचान एक स्टिंग ऑपरेशन के टेप के बाद की जा चुकी है।

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इस बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए पुलिस उपायुक्त (अपराध) जॉय तिर्की ने कहा कि, रोहित ने कोई जवाब नहीं दिया है, लेकिन अवस्थी ने जांच में शामिल होने का वादा किया, लेकिन शनिवार को वह जांच मे शामिल नहीं हुआ। पुलिस ने कहा, “हम रोहित से संपर्क नहीं कर सके, लेकिन हम अवस्थी के हमारे पास आने का इंतजार कर रहे हैं।

” स्टिंग आपरेशन में बनायी गयी विडेयो – रोहित और अक्षत – 5 जनवरी को जेएनयू हिंसा का नेतृत्व करने वाले हमले में उनकी भागीदारी और भीड़ का हिस्सा होने की गवाही दे रहे हैं। डीसीपी ने यह भी कहा कि, उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के नौ छात्रों को नोटिस भेजे हैं, जिन्हें उन्होंने शुक्रवार को पहचाना था। पुलिस ने कहा कि, 37 अन्य व्हाट्सएप ग्रुप के सदस्य को भी नोटिस भेजे गए हैं, जिन्होने इस हिंसा का समर्थन किया था। हालांकि, तिर्की ने कहा कि ये स्पषट नहीं है कि सभी 37, जिन्हें जांच में शामिल होने के लिए कहा गया है, वे विश्वविद्यालय के छात्र हैं।

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“यह व्हाट्सएप ग्रुप जिसे यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट’ नाम दिया गया था। इसका गठन योगेन्द्र भारद्वाज द्वारा किया गया था, जो शुक्रवार को पहचाने गए नौ छात्रों में से एक था। पुलिस ने समूह के 37 सदस्यों की पहचान की है और पाया है कि उनके पते दिल्ली भर में बिखरे हुए हैं। डीसीपी ने कहा,  हमें यह पता लगाना अभी बाकी है कि वे बाहरी लोग हैं या विश्वविद्यालय के छात्र हैं। हिंसा में उनकी भागीदारी की जांच की जा रही है। किसी भी राजनीतिक या छात्रों के समूह से उनका जुड़ाव अब हमारे लिए अज्ञात है, ”। डीसीपी ने कहा कि, अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

तीन जनवरी को जेएनयू से हिंसा की घटनाएं पहली बार सामने आई, जब दो छात्र समूह कथित तौर पर सेमेस्टर पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर आपस में भिड़े थे। हिंसा 4 जनवरी को फिर से भड़की। 5 जनवरी को हालात बद से बदत्तर हो गए, जब कई नकाबपोश लोग लाठी-डंडों और हथियारों से लैस विश्वविद्यालय परिसर मे घुस आये। शुक्रवार को पुष्टि की गयी थी कि, भारद्वाज और पटेल संगठन के सदस्य थे लेकिन उन्होंने हिंसा में अपनी भूमिका से इनकार किया। जेएनयू की छात्रा और एबीवीपी की राष्ट्रीय महासचिव निधि त्रिपाठी ने शुक्रवार को कहा था कि, कैंपस में हिंसा भड़कने के बाद भारद्वाज ने एक-दूसरे की मदद के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था।

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हिंसा और बर्बरता की कई वीडियो रिकॉर्डिंग और तस्वीरें बाद में सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गईं। हिंसा की जांच अपराध शाखा की एक विशेष जांच टीम को सौंपी गई, जिसकी अध्यक्षता डीसीपी तिर्की कर रहे हैं।बता दें आपको अब तक दिल्ली पुलिस ने तीन दिनों में हुई हिंसा में तीन एफआईआर दर्ज की हैं। तिर्की ने कहा कि उन्हें 15 अलग-अलग लिखित शिकायतें मिली हैं, जिन्हें वे देख रहे हैं।

तिर्की ने कहा कि, अब तक वे वार्डन, शिक्षक, घायल छात्रों, सुरक्षा अधिकारियों और विश्वविद्यालय के अन्य कर्मचारियों सहित 30 से अधिक व्यक्तियों के बयान दर्ज कर चुके हैं। “हम घटनाओं के अनुक्रम को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। चूंकि परिसर से सीसीटीवी फुटेज हमारे लिए उपलब्ध नहीं थे, क्योंकि हिंसा के पहले दिन सर्वर रूम को निशाना बनाया गया था, हम इस घटना के वायरल वीडियो और फुटेज का सहारा ले रहे हैं। डीसीपी ने यह भी कहा कि, कुछ छात्रों के स्टिंग के बाद, जिन्होंने कथित रूप से लिप्त होने और हिंसा का नेतृत्व करने की बात स्वीकार की है, वे बाद मे अपनी बात से पलट गये।

तुर्की ने यह भी कहा कि, वे कुछ अन्य नकाबपोश लोगों की पहचान करने की प्रक्रिया में हैं, जिन्हें वायरल वीडियो और तस्वीरों में हिंसा में लिप्त देखा गया था। “हमारे पास वीडियो फुटेज और चित्र हैं जो सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे थे और कैंपस में नकाबपोश हमलावरों की पहचान करने के लिए उनका उपयोग कर रहे हैं,” ।     

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