ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: हरियाणा में सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार कम होने के बाद अब इन्हे बंद करने की तैयारी हो रही है. हरियाणा सरकार ने अगले सत्र से राज्य के 1026 प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है. प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से इसे लेकर सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों से इस बाबत  रिपोर्ट मांगी गई है. आगामी सत्र से बंद होने वालों की सबसे ज्यादा संख्या पूर्व शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के गृहजिले महेंद्रगढ़ में है. इस जिले में के 122 स्कूलों को बंद करने की तैयारी है. सबसे काम स्कुल नूंह में बंद होंगे. यहाँ 2 स्कूलों को बंद किया जा सकता है।

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प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने जारी की रिपोर्ट

प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से कहा गया है कि जो स्कूल बंद किये जा रहे हैं उनके छात्रों को आस पास के करीबी स्कूलों में समायोजित किया जाएगा. ऐसे में में जिन स्कूलों में ये बच्चे समायोजित किये जाने हैं उनकी रिपोर्ट मांगी गई है. रिपोर्ट में विभाग की ओर से बंद होने वाले स्कूल से दूसरे स्कूल की दूरी के साथ वहां शिक्षकों की संख्या, बच्चों की संख्या आदि सूचना मांगी गई है। बंद होने वाले वे स्कूल हैं, जहां 25 से कम बच्चे पढ़ रहे हैं। इन स्कूलों में बच्चों की संख्या के आधार पर ही इन्हें मर्ज करने का फैसला लिया है, ताकि यहां कार्यरत शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में तैनात किया जा सके। विभाग की ओर से जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों से 31 जनवरी तक पूरी रिपोर्ट मांगी गई है।

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हैरानी की बात यह है कि सरकार द्वारा जिन स्कूलों को बंद किए जाने की तैयारी है, उनमें 34 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक भी शिक्षक नहीं है। इनमें अम्बाला में दो, फतेहाबाद में एक, गुड़गांव में 4, करनाल में एक, महेंद्रगढ़ में 14, पंचकूला में तीन, रेवाड़ी में 2, रोहतक में एक, यमुनानगर में 5 स्कूल शामिल हैं। प्रदेश के 79 स्कूलों में पांच या इससे कम बच्चे पढ़ रहे हैं। इनमें भिवानी में 9, चरखी दादरी में 7, फरीदाबाद, जींद, पलवल, पंचकूला, में एक-एक, गुड़गांव, हिसार, सोनीपत, झज्जर, कैथल में 3-3, करनाल में 4, कुरुक्षेत्र में 10, महेंद्रगढ़ में 16,, रेवाड़ी में 6, सिरसा व यमुनानगर में 4-4 स्कूल शामिल हैं।

 

बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी सरकार की

हालाँकि राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के नेता बच्चों की संख्या कम होने में शिक्षकों की कमी नहीं मानते हैं। वे सरकार पर दोष मढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री बयान दे रहे हैं कि प्राइवेट स्कूल की ओर से सरकारी स्कूल को गोद लिया जाए। जबकि इसके उलट होना चाहिए। बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी सरकार की है। उनका कहना है कि शिक्षकों को इतने गैर शैक्षणिक कार्य दे दिए जाते हैं कि वे पढ़ाई का पूरा काम तो नहीं करा पा रहे। बच्चों की संख्या कम होने की बड़ी वजह सरकार की कमी है। जिस तरह से सरकारी स्कूलों को तालाबंदी की तलवार लटक रही है उससे गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा कैसे मिलेगी यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब कम से कम सरकार तो देना नहीं चाहती।

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