आए दिन किसान जान दे रहा है। सरकारें भी बेबस नजर आ रही है। और ये जालिम दुनिया भी किसानों के जख्मों पर मरहम लगाना तो दूर बल्कि उनकी मौत की वजह बन रही है। जी हां सच कह रहे हैं हम। बरनाला के गांव उपली में कुछ ऐसा ही हुआ है। एक किसान ने अपनी जमीन रिश्तेदार को ठेके पर दी हुई थी। लेकिन रिश्तेदार ने वह जमीन आगे बेच दी। इसी बात से परेशान किसान ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली।

इससे पहले अलग अलग जगहों पर तीन किसानों ने मौत को गले लगा लिया। फिरोजपुर में 35 साल के किसान गुरूदेव सिंह ने जहर खाया क्योंकि उसके पास सिर्फ चार एकड़ जमीन थी और कर्ज 13 लाख रुपये था। कर्ज नहीं चुका पाने पर उसने आत्महत्या कर ली।

उधर होशियारपुर के गांव खाखा घुला में कर्ज से परेशान किसान पिता -पुत्र ने जहरीली पदार्ध निगल लिया। जिसके बाद किसान सुखविंदर सिंह की मौत हो गई जबकि मृतक किसान के 16 साल के बेटे का जालंधर के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

ऐसा ही कुछ संगरूर में हुआ। 4 लाख रुपये के कर्ज में दबे किसान ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। किसान तो कर्ज से पीछा छुड़वा गए लेकिन परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है।

किसानों की हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है। कातिल कर्ज अब तक कई घर बर्बाद कर चुका है। अगर सरकारें सिर्फ बातें ही करती रही तो नाजाने और कितने घर उजड़ जाएंगे।

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