ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज:- भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से मुलाकात करेंगे। ये मुलाकात राम जन्मभूमि में फैसले से पहले राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के लिए की जायेगी। बता दें अगले सप्ताह  बाबरी मस्जिद – राम जन्म भूमि शीर्षक के मामले का फैसला आने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश शुक्रवार दोपहर को अपने कक्ष में बैठक करने वाले हैं। मुख्य न्यायाधीश गोगोई के 17 नवंबर को अपने कार्यालय का उद्घाटन करते हुए, अगले हफ्ते फैसला सुनाए जाने की उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक पांच जजों वाली संविधान बैंच, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश ने की, हिंदू और मुस्लिम दावेदारों के बीच मध्यस्थता विफल होने के बाद 6 अगस्त को अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुनवाई शुरू हुई थी।

40 दिनों की सुनवाई में बहुत सारा नाटक था। आखिरकार 6 अगस्त को शुरू हुई ये सुनवाई 16 अक्टूबर को समाप्त हुई। संविधान पीठ, जिसमें जस्टिस एस ए बोबडे भी शामिल हैं, D.Y. चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस. अब्दुल नज़ीर, अंतिम दिन अंतिम दिन पार्टियों का निर्देशन करते हुए अपने-अपने पक्ष की और से लिखित प्रस्तुतियां देने के लिए निर्देश दिए और उन मुद्दों को कम किया, जिस पर अदालत को अगले सिर्फ तीन दिनों की सुनवाई पर फैसला करना है। इस विवाद में तीन प्रमुख पक्षों ने लिखित बयान के माध्यम से दिशा-निर्देश मांगे।

फैसला काफी गंभीर सामाजिक और राजनीतिक निहितार्थ हैं, क्योंकि यह बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 27 वीं वर्षगांठ से कुछ हफ्ते पहले आएगा। वहीं यह दिल्ली और बिहार के विधानसभा चुनावों से पहले आएगा। भारतीय जनता पार्टी, जो केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के प्रमुख हैं, अपने चुनावी घोषणा पत्र में राम मंदिर वहीं बनेगा का वादा किया था। 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के समक्ष चौदह अपील दायर की गई थीं, जिसमे कहा गया था कि, विवादित 22.7 एकड़ को सुन्नी वक्फ बोर्ड के मध्य समान रूप से विभाजित किये जाना चाहिए, निर्मोही अखाड़ा और राम लल्ला के मध्य।

6 दिसम्बर 1992 में, 16 वीं सदी की बाबरी मस्जिद, हिंदू समूहों द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था जो इस स्थल पर राम मंदिर बनवाने के चाहवान हैं।

 

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