Online Desk/ Living India News: करेला भले ही खाने में कड़वा लगे…लेकिन इससे होने वाली कमाई से आपकी जिंदगी मीठी हो सकती है। दरअसल सब्जी उगाने वालों किसानों के लिए ये देसी तकनीक बहुत ही फायदे मंद है जिस तकनीक के सहारे हरियाणा का किसान राजेश इसका उत्पादन कर रहा है। गांव अहिरका के किसान राजेश ने देसी जुगाड़ से करेले का उत्पादन शुरू किया है। दो एकड़ में रोजाना दो से तीन क्विंटल करेले का उत्पादन हो रहा है। और करेले को राजेश बाजार में 30-50 रूपये प्रति किलो बेचकर मुनाफा कम रहा है।

growing karela at cheap cost
करेले के लिए कारगर देसी तकनीक
पोली और नेट हाउस पर भारी भरकम खर्च आता है, आंधी तूफान में इसके उखड़ने से किसान को काफी नुकसान भी होता है लेकिन राजेश ने जो तकनीक अपनाई उससे फायदा ही फायदा है। राजेश ने बांस के सहारे रस्सियां बांधकर कम खर्च में करेले की उन्नत खेती शुरू कर दी। इसका सबसे बड़ा फायदा ये हुआ की तेज बारिश होने की स्थिति में भी सब्जी खराब नहीं होती और उत्पादन लंबे समय तक होता है।

कैसे मिली प्रेरणा ?
किसान राजेश को बरवाला में एक किसान से इसकी प्रेरणा मिली, जिसने करेला टमाटर और तोरी की खेती की थी। उसने बांस पर बेल चढाई हुई थी। जिससे बारिश में सब्जियां खराब नहीं हुई। इसी तर्ज पर उसने अपने खेत में पिछले साल आधा एकड़ में तोरी लगाई थी, जिससे 90 हजार रूपये का उत्पाद हुआ। फरवरी में तोरी लगाई और नवंबर तक उत्पादन होता रहा। राजेश की माने तो इसमें कम से कम पेस्टीसाइड की जरूरत होती है। सबसे ज्यादा फायदा ये होता है कि सब्जी साफ सुथरी होती है, खरपतवार का टेंशन नहीं, जहरीले कीट का डर भी नहीं रहता।

बांस के सहारे करेले की उन्नत खेती !
दरअसल करेले की बेल होती है, अगर वो नीचे होती है तो जमीन में करेला सड़ जाता कीड़े लग जाते हैं खरपतवार को साफ करने में काफी मेहनत और खर्च बढ़ता है। राजेश ने इस बार 2 एकड़ में करेला लगाया है। खेत के एक से दूसरे साइड तक लाइऩ बनाकर करेले की बिजाई की। जिससे हवा आसानी से पास हो सके। हर 10 फीट पर बांस गाड़ा गया है। और सबको प्लास्टिक से बांध दिया जिससे बांस धूप बारिश में खराब नहीं होगी। करेला की बेल रस्सी पर चढ़ जाती है। इस तकनीक से एक एकड़ पर करीब 1 लाख खर्च हुआ है। अप्रैल के अंत से करेले का उत्पादन शुरू होगा।

करेले की खेती से 15 महिलाओं को रोजगार
करेले की खेती से राजेश को अच्छा उत्पादन मिलता है और मुनाफा भी अच्छा होता है। लेकिन सबसे बड़ी बात है कि इस खेती के जरिए राजेश ने 15 महिलाओं को रोजगार भी दिया है। खेती का पूरा काम महिलाए करती है। बांस गांड़ना, बिजाई, तुड़ाई। उसके बाद राजेश सब्जी लेकर मंडी जाता है और आसानी से करेले बेचकर अच्छा भाव कमाता है।

ग्रेजुएट किसान हैं राजेश
आपको हैरानी होगी, राजेश के परिवार में कुल 24 सदस्य है, पांच भाई उनकी पत्नियां और 12 बच्चे। राजेश ग्रेजुएट किसान है। 2001 में ग्रेजुएशन करने के बाद जब राजेश को नौकरी नहीं मिली तो उसने खेती करनी शुरू कर दी। आठ एकड़ जमीन पर राजेश खेती करता है। राजेश ने खेती के लिए नेट हाउस लगाने की सोची थई लेकिन 18 लाख सालाना खर्च आने के कारण उसने देसी तरीका आजमाया जो पुरी तरह फायदेमंद है

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