ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए पूरा देश सड़कों पर उतर गया | सरकारें शहादत को हर पल नमन करती दिखी | कैंडल मार्च निकले, पाकिस्तान के खिलाफ रोष मार्च भी निकले, शहीदों के घर सियासतदानों का तांता भी लगा | लेकिन क्या कभी सोचा है, ये सब आखिर कब तक चलता है | जो सरकारें हर संभव मदद की घोषणाएं करते नहीं थकती | क्या असल में शहीदों के परिवारों की मदद करती है | कई सवाल हैं जिनका जवाब इस रिपोर्ट से आपको शायद मिल जाएगा, और शायद फिर कुछ बदलाव भी आएगा |

टोहाना का एक ही जवान नहीं है जिसका परिवार जवान की शहादत के बाद सरकार की नजरअंदाजी का शिकार हुआ है | भारत-पाक युद्ध का योद्धा हरी सिंह सैनी | जिसे पहले युद्ध बन्दी बताया गया | बाद में शहीद घोषित किया गया | लेकिन उसका पार्थिक शव भी परिवार को नसीब नहीं हुआ | सरकारे आई और गई पर इस योद्धा की कहानी गुमनामी में खो गई | शहीद के परिवार को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है | उनकी पत्नी ने 121 रुपए पेंशन पर अपनी 4 बेटियों और 2 बेटों का पालन पोषण किया | उनके बेटे का कहना है कि आज अभिनन्दन के लिए पूरा देश चिनन्त हैं पर उसके पिता जिनके बारे में उसे बताया गया था कि युद्ध बंदी हैं पर उनका कुछ पता नही लगा | सरकार वायदे बहुत करती हैं पर धरातल पर शहीद परिवारों को शहीद का दर्जा भी नहीं मिलता |

 Watch Video

LEAVE A REPLY