ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया: पंजाब में ब्यास दरिया में फैक्ट्री का कैमिकल मिलने से दरिया का पानी दूषित हुआ। जिससे हजारों टन मछलियों की मौत हो गई। जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा तो मामले में सियासत भी शुरू हुई। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाए तो सरकार ने जांच की बात कही। पर वहीं दूसरी तरफ एनजीटी ने पंजाब सरकार पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को नोटिस जारी किया। गौरतलब है कि ये मामला पहला नहीं जब पंजाब के दरिया का पानी दुषित हुआ हो।

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करीब 10 साल पहले भी पंजाब में दरिया का पानी दूषित हो चुका है जिसके परिणाम खतरनाक निकले है। बता दें कि जिला फाजिल्का के गाँव तेजा रुहेला  में काला पानी इतना भयानक निकला कि वहां के बच्चों को अपाहिज बना दिया।

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रुहेला गाँव भारत पाकिस्तान सरहद पर पड़ता है जहाँ पास से बहती सतलुज नदी मे कई वर्ष पहले पाकिस्तान के कसूर जिले और लुधियाना की चमड़ा फैक्ट्रियों के कैमिकल पानी के आने से लोग पानी के सेवन का इस कदर शिकार हुए कि इस गाँव के दर्जनों बच्चे दिव्यांग हो गए। किसी की आँखे चली गई, किसी के शरीर का एक हिस्सा काम करना बंद कर गया, किसी की चमड़ी में दरारे पड़ गई तो कोई मंदबुद्धि हो गया।

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Gepostet von Living India News am Sonntag, 27. Mai 2018

 

ऐसे कई बच्चे आज भी इस गाँव में मौजूद है जो पानी के सेवन का शिकार हुए है। न तो सरकार ने इनकी सुनी और न ही प्रशासन ने, इस गाँव की तस्वीर ये ब्यान करती है कि जब मनुष्य की जिंदगी में ऐसा काला पानी आता है तो पूरी की पूरी पीढ़ी बर्बाद हो जाती है। पीड़ित कृष्णा रानी बताती है कि उनकी दोनों बेटियां न चल पाती है और न ही इनका शरीरिक और मानसिक विकास हुआ है और आज तक सरकार ने भी उनकी सार नहीं ली।

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गाँव के कई घरों में गलियों में ऐसे बच्चे अक्सर ही देखें जा सकते है। दूषित हुआ जमीनी पानी का स्तर न सिर्फ पीने लायक पानी के जरिए उनकी जिंदगी बर्बाद कर रहा है साथ ही फसलें भी खराब हो जाती है जिससे गाँवों के लोग आर्थिक स्तर से भी कमजोर हो रहे है। वही इस सब पर फाजिल्का के सिविल सर्जन बताते है काफी समय पहले गाँव के पानी की सैम्पलिंग की गई थी आज के समय में अब सुधार हुआ है।

 

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