ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया : भारत में चीन के बाद दुनिया के सबसे ज्यादा मोबाइल सब्सक्राइबर हैं। अगर मोबाइल ग्राहकों के बढ़ने की यही रफ्तार रही तो वो दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया का सबसे ज्यादा सब्सक्राइबर वाला देश बन जाएगा। खैर, बात मोबाइल की नहीं करनी है, लेकिन बात मोबाइल से भी जुड़ी है। दरअसल, मोबाइल पर नेटसर्फिंग करने में भारतीयों को कोई सानी नहीं है। हालात यह हैं कि भारतीयों के हाथ में पानी की बोतल से ज्यादा मोबाइल देखने को मिल जाएंगे। और, अधिकांश मोबाइल पर देर रात को पॉर्न साइट्स भी सर्फ की जाती हैं। अगर आप भी मोबाइल पर पॉर्न साइट्स देखने के शौकीन हैं तो यह खबर आपको जरूर पढ़नी चाहिए।

‘जर्नल ऑफ सेक्सुअल मेडिसिन’ की रिपोर्ट पढ़ी आपने?

असल में पॉर्न देखने वालों की मानसिक और शारीरिक स्थिति को समझने के लिए पत्रिका ‘जर्नल ऑफ सेक्सुअल मेडिसिन’ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में पॉर्न देखने वालों का वर्गीकरण किया गया है। हालांकि, रिसर्च में इस बात का खुलासा जरूर हुआ है कि पॉर्न देखना नुकसानदायक नहीं है, ठीक उलटे इससे काफी फायदा होता है। अब बात करते हैं पत्रिका के रिसर्च की। रिसर्च में करीब 850 लोगों से सवाल-जवाब किए गए। इसमें विवाहित, समलैंगिक, प्रेमी-प्रेमिका, सभी तरह के लोग शामिल थे। इनसे कुछ सवाल पूछे गए, जिसके जबाव के आधार पर रिसर्च पूरा किया गया। पहले पढ़िए इनसे किस तरह के सवाल पूछे गए।

आप एक दिन में कब और कितना पॉर्न देखते हैं?
पॉर्न देखने और बाद में आपको कैसा महसूस होता है?
पॉर्न देखना अच्छा लगता है या बुरा और इससे आपके सेक्सुअल लाइफ पर कैसा असर पड़ता है?

सवालों के जबाव के आधार पर बनाए तीन कैटेगरी

सवालों के जबाव के आधार पर पॉर्न देखने वालों को तीन कैटेगरी में बांट दिया गया। इनमें से ‘रिक्रिएशनल व्यूअर्स’ को सबसे हेल्दी माना गया। रिसर्च में माना गया कि इस कैटेगरी के लोग अपनी सेक्सुअल और पर्सनल लाइफ को काफी हद तक एंज्वाय करते हैं। इनका इमोशनल स्तर भी काफी अच्छा रहता है। इस कैटेगरी के लोग पॉर्न देखकर उसी तरह की एंज्वायमेंट हासिल करने की पूरी कोशिश करते रहते हैं।

बाकी दोनों कैटेगरी के लोगों के बारे में दिलचस्प तथ्य

रिसर्च में ज्यादा पॉर्न देखने वालों को ‘सेक्सुअली कम्पलसिव व्यूअर्स’ कैटेगरी में रखा गया। बताया गया है कि इस कैटेगरी के लोग अकेले बैठकर पॉर्न देखना पसंद करते हैं। हालात यह है कि इन्हें पॉर्न की ऐसी लत लग चुकी होती है कि वो इसे देखे बिना नहीं रह पाते हैं। मतलब पॉर्न इनके लिए नशा के समान हो चुका है। तीसरे कैटेगरी के लोगों को ‘डिस्ट्रेस्ड नॉन-कम्पलसिव’ में रखा गया। इनका पॉर्न देखने का मकसद सिर्फ ‘फील गुड’ के लिए होता है। दरअसल, इस कैटेगरी के लोग अपनी सेक्सुअल लाइफ से असंतुष्ट होते हैं और अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए पॉर्न देखते हैं।

 

LEAVE A REPLY