ऑनलाइन डेस्क/लिविंग डेस्क : किसी के साथ भर होने से प्रेम नहीं होता है। दरअसल, प्रेम एक ऐसा अहसास है जो साथी के पास या दूर रहने से नहीं घटता है। अगर प्रेम सच्चा हो तो, साथी हर समय साथ-साथ मौजूद रहता है। और, अगर कोई प्रेम के इस पक्ष को शिद्दत से समझ ले तो जीवन वास्तविक खुशियों से घिर जाती है। कविता ‘तुम्हारा होना मेरे जीवन का हिस्सा बन गया’ में आपको प्रेम की उसी वास्तविकता का अक्स मिलेगा, जिसके बारे में शुरू में कहा जा चुका है। आप भी इस कविता को पढ़कर समझें, आरोह-अवरोह, मिलन-जुदाई, प्यार-तकरार के रास्तों से गुजरकर एक-दूसरे में हमेशा के लिए एकाकार हो जाने वाले प्रेम को।

तुम्हारा होना मेरे जीवन का हिस्सा बन गया 

तुम मेरे साथ नहीं होते हुए भी साथ होती हो हमेशा
सड़क चलती बस की लाइट में तुम्हारा चेहरा दिखता है,
जैसे ट्रेन की सीटी में बस तुम्हारा नाम ही गूंजता हो
जैसे सड़क पर तन्हा चलने के दौरान तुम साथ रहती हो।

इस तड़प को छिपाकर भी छिपाने में दिक्कत है मुझे
जैसे कोई घना कोहरा सीने को घेरता जा रहा मेरे,
जैसे कोई चिड़िया हर पल कानों में मिश्री घोल रही हो
जैसे तुम्हारे साथ ना होना भी साथ होने का हुनर है।

कई तड़पती रातों से गुजरकर मैं यहां पहुंचा
लिखने-पढ़ने से कोसों दूर, कुछ कहने की दुनिया में,
मैं तुम्हारी आवाज नहीं पहचानना चाहता अब
संकोच और सोच के दायरों में उलझता जा रहा मैं।

अब, भूलता जा रहा कि तुम भी कभी जिंदगी थे
तुम भी कभी दिल में धड़कन बन धड़कते थे,
जैसे रगों में बहते खून में तुम मौजूद रहती थी
जैसे गर्म सांसों के हर ठहराव पर तुम ठहरती थी।

मैंने चेतन से लेकर अवचेतन तक को टटोला
सांस की आखिरी पायदान तक उतरा था मैं,
जैसे मन के हर कोने को उम्मीदों से पोंछता रहा
जैसे तुम हो जीवन के हर पड़ाव पर मौजूद।

मैं सामान्य मनुष्य होते हुए असामान्य होता गया
मैंने प्रेम की भाषा सीखी फिर अक्षरों को जोड़ता रहा,
अक्षरों को जोड़कर मैं तुम्हारा नाम लिखना सीख गया
बस, यहीं मेरी खोज खत्म हो चुकी थी अब।

दरअसल, खोज अंतर्मन से जुड़ा हुआ था मेरा
वो खोज जिसमें तुम्हारा दूधिया चेहरा मुस्कुराता था,
जैसे मेरी हाथों की लकीरों से तुम झांकती रहती थी
तुम्हें जिंदगी में महसूस करना ही मेरा शौक है अब।

दरअसल बस, जीवन, नब्ज, धड़कन सिर्फ प्रतिबिंब हैं
आकाश, चिड़ियों की चहचहाहट, खेतों की हरियाली भी
सभी तुम्हारी मौजूदगी का सरमाया भर हैं मेरे लिए
इस तन्हा रात में इतना काफी है तुम्हें समझने को।
(समाप्त)

अभिषेक मिश्रा
लिविंग इंडिया न्यूज
मोहाली, पंजाब
मोबाइल : 9334444050, 9939044050

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