लिविंग इंडिया/ऑनलाइन डेस्क: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को एक और इतिहास रचते हुए अपने 100वें उपग्रह का अंतरिक्ष में प्रक्षेपण किया | चेन्नई से 110 किलोमीटर दूर स्थित श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से इस 100वें उपग्रह के साथ 30 अन्य उपग्रह भी अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किए गए | अपने इस 42वें मिशन के लिए इसरो ने भरोसेमंद कार्योपयोगी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी40 को भेजा, जो कार्टोसेट-2 श्रृंखला के उपग्रह और 30 सह-यात्रियों को लेकर सुबह 9 बजकर 28 मिनट पर सफलतापूर्वक उड़ान भरी ।

अंतरिक्ष के क्षेत्र में इतिहास रचते हुए भारत नें आज अपने सौंवे अंतरिक्ष मिशन को सफलता पूर्वक अंजाम दिया पीएसएलवी-सी 21 के माध्यम से दो विदेशी उपग्रह को भी स्थापित किया । बता दे कि चेन्नई से करीब 110 कि. दूर स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद से पीएसएलवी–सी 21 सुबह नौ बज कर 53 मिनट पर रवाना हुआ । यह पूरी तरह वाणिज्यिक उड़ान थी और पीएसएलवी अपने साथ कोई भारतीय उपग्रह नहीं ले गया था । जानकारी के लिए बता दे कि उसके साथ दो उपग्रह जापान और फ्रांस थे । प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस ऐतिहासिक मिशन को शानदार सफलता करार दिया । राधाकिश्न ने संवादाताओं से कहा कि आज के सफल मिशन के साथ ही एजेंसी ने 62 उपग्रह, एक स्पेस रिकवरी मॉड्यूल और 37 रॉकेटों का प्रक्षेपण कर लिया तथा इनकी कुल संख्या 100 होती है । बता दे कि आज इसने अपनी 21 सफल उड़ान भरी है । अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, मलबे के 500,000 से अधिक टुकड़े या `स्पेस जंक’ का पृथ्वी की कक्षा में पता चला है। यह कचरा 17,500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रहा है जो मलबे के छोटे टुकड़े से भी उपग्रह या अंतरिक्ष यान को क्षतिग्रस्त करने के लिए पर्याप्त है । मिशन के निदेशक कुन्हाली कृष्णन ने इस प्रक्षेपण को बहुत बड़ी सफलता करार देते हुए कहा कि रॉकेट के सभी चारों चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुए।

इसरो ने रचा इतिहास

अंतरिक्ष में भेजा अपना 100वां सैटेलाइट

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