ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया : पंजाब के बठिंडा स्थित गुरूनानक देव थर्मल पावर प्लांट को लेकर जारी विरोध के बीच CM कैप्टन अमरिंदर सिंह ने साफ कर दिया है कि प्लांट बंद करने के आदेश को वापस नहीं लिया जाएगा। CM के बयान से साफ हो गया है कि सरकार प्लांट को बंद करने से पीछे नहीं हटेगी। हालांकि, CM ने आश्वासन दिया है कि कामगारों को प्लांट बंद होने के बाद भी रोजगार मिलेगा। CM ने कहा है कि गुरूनानक देव थर्मल पावर प्लांट को चलाने में काफी लागत आ रही है, जबकि कम लागत पर दूसरे संसाधनों से राज्य को समुचित मात्रा में बिजली मिल रही है।

सीजन के अनुसार मांग में परिवर्तन

दरअसल, सरकार का तर्क है कि प्लांट पर सरकार ज्यादा खर्च कर रही है। इसको बंद करने से बिजली उत्पादन के लिए अतिरिक्त राशि मिलेगी। साथ ही साफ किया है कि प्लांट में काम करने वालों (रेगुलर या कांट्रेक्ट) की छंटनी नहीं होगी। उनको पूरे वेतन पर नजदीकी संस्थानों या जहां आवश्यकता होगी, काम दिया जाएगा। CM ने कहा कि धान के सीजन और इसके अलावा दूसरे सीजन में पंजाब में बिजली की मांग में बहुत फर्क देखा जाता है। कुछ ऐसा ही गर्मी और ठंड के मौसम में भी है। इस बार गर्मी में अधिकतम बिजली की मांग 11,600 मेगावॉट जबकि ठंड में 5600 मेगावॉट थी।

बिजली उत्पादन में हुई बढ़ोत्तरी

अगर 2009 से 2017 तक पंजाब में बिजली उत्पादन के आंकड़ों पर गौर करें तो स्पष्ट है कि बिजली का उत्पादन दोगुना हो गया है। 2009 में जहां 6900 मेगावॉट का उत्पादन हो रहा था, वो अब बढ़कर 14,000 मेगावॉट हो चुका है। जबकि सूबे में बिजली की बिक्री करीब 40 फीसद बढ़ी है। यह 32,000 से बढ़कर 44,400 मेगा यूनिट तक पहुंचा है। CM ने बताया कि बठिंडा थर्मल प्लांट की पुरानी तकनीक के कारण इसमें दूसरे प्लांट्स की तुलना में बिजली उत्पादन के लिए कोयले की खपत अधिक होती है। वित्तीय वर्ष 2016-2017 में बठिंडा प्लांट में दूसरे प्लांट्स की तुलना में यहां प्रति यूनिट ज्यादा कोयले की खपत हुई है।

 

 

 

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