न्यूज़ डेस्क/लिविंग इंडिया : घरवालों ने विरोध किया, किसी को यह गंवारा नहीं लगा कि घर की बेटी टैक्सी चलाएगी। लेकिन बेटी ने ठान लिया तो बस ठान लिया और आज मनाली की 20 साल की बेटी रवीना ठाकुर हिमाचल प्रदेश की पहली महिला टैक्सी ड्राइवर बन गई हैं। रवीना ने यह फैसला परिवार को आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए लिया और आज खुशी-खुशी टैक्सी चला रही हैं। रवीना शुरू में तो आर्मी ऑफिसर बनना चाहती थीं, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। इसके बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी, गाड़ी चलाने का लाइसेंस लिया और शुरू किया एक शानदार सफर।

रवीना के पिता खुद टैक्सी चलाते थे और शुरूआत में उसने पिता से ही टैक्सी चलाना सीखा। लेकिन एक साल पहले पिता के निधन के बाद सब कुछ बदल गया। रवीना की मां चाय स्टॉल चलाती थीं, जिसे हाईवे बनाने के कारण तोड़ दिया गया। पिता दुनिया में नहीं रहें और टैक्सी घर के बाहर बेकार खड़ी रहती थी। इस दौरान परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा था। बहुत सोचकर रवीना ने घर में बेकार खड़े टैक्सी को चलाने का फैसला ले लिया। फिलहाल रवीना टैक्सी चलाकर परिवार को मदद पहुंचाने के साथ ही, भाई-बहनों की पढ़ाई का पूरा खर्च भी उठा रही हैं।

परिवार की मदद कर रही रवीना की समाज से शिकायतें भी हैं। उसका कहना है कि लोग टैक्सी चलाता देखकर उस पर ताने मारते हैं। परिवार और आस-पड़ोस के लोगों ने टैक्सी चलाने के उसके फैसले का काफी विरोध किया। कोई नहीं चाहता था कि वो टैक्सी चलाए। लेकिन इस घड़ी में मां ने साथ दिया। मां से मिले हौसले की बदौलत उसने टैक्सी चलाना शुरू किया, आज वो और उसका परिवार काफी खुश है। और उसे उम्मीद है कि आने वाला कल आज से बहुत बेहतर होगा। दरअसल, रवीना सिर्फ एक टैक्सी ड्राइवर ही नहीं हैं, वो नारी सशक्तिकरण की बेमिसाल उदाहरण भी हैं।

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