न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : दिवाली में होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने के मकसद से सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आतिशबाजी पर रोक लगा दिया था। दूसरी तरफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी आतिशबाजी का समय शाम 6.30 से रात 9.30 बजे तक निर्धारित कर दिया था। इसके बावजूद लोगों ने जमकर आतिशबाजी की और अदालत के आदेश को ठेंगा दिखा दिया। लेकिन आपको पता है कि आपने अपनी जरा सी खुशी के लिए कितना खतरनाक काम किया था। जी हां, दिवाली की रात पंजाब के लुधियाना की हवा में जहर बह रही थी, जो किसी को भी मौत की नींद सुलाने के लिए काफी थी।

इस खतरनाक सच का खुलासा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board : CPCB) की AQR (Air Quality Report) से हुआ है। CPCB की रिपोर्ट से पता चलता है कि दिवाली की रात राजस्थान के अलवर जिले में पड़ने वाले भिवाड़ी शहर की हवा सबसे प्रदूषित थी।रिपोर्ट में भिवाड़ी को पहला जबकि कोलकाता को दूसरा स्थान दिया गया है। इसके बाद ताजमहल की धरती आगरा का नंबर आता है। हैरानी की बात यह है कि CPCB की 2016 रिपोर्ट में भी आगरा तीसरे स्थान पर था। CPCB ने दिवाली की रात AQR के आंकड़ों के आधार पर लुधियाना की हवा को काफी खतरनाक माना है।CPCB ने लुधियाना के अलावा चेन्नई, फरीदाबाद, गाजियाबाद, कानपुर समेत दूसरे शहरों की हवा को भी खतरनाक स्तर पर रखा है। हवा के खतरनाक स्तर का मतलब है कि यह हमारे शरीर के लिए जानलेवा हो सकता है। ज्यादा वक्त इस हवा में गुजारने के बाद सांस से संबंधित गंभीर बीमारी हो सकती है।दरअसल, कोर्ट के आदेश के बावजूद लोगों ने आतिशबाजी करके यह साबित कर दिया कि उन्हें अपने भविष्य की जरा भी फिक्र नहीं है। क्योंकि पिछले साल दिवाली के बाद दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा के स्कूलों को बंद कर दिया गया था। इसका एकमात्र कारण आतिशबाजी के बाद हवा का जहरीला होना था।

 

 

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