न्यूज़ डेस्क/लिविंग इंडिया : 8 अक्टूबर को करवा चौथ है, सुहागिनों का यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाया जाता है। पति की लम्बी आयु के लिए महिलाएं इस पर्व को मनाती हैं। दिन भर व्रत रखने के बाद महिलाएं सजधज कर पूजा करती हैं और फिर छलनी से पति को देखकर व्रत खोलती हैं। दरअसल, छलनी से पति को देखने के पीछे एक पौराणिक कथा है।

मान्यता है कि वीरवती नाम की महिला ने शादी के पहले साल करवा चौथ का व्रत रखा था। व्रत के दौरान भूख से उसकी तबियत बिगड़ने लगी तो भाइयों ने एक पेड़ पर छलनी की ओट में दिया जलाकर रख दिया। फिर बहन को चांद बताकर उसके व्रत को खुलवा दिया। इस कारण वीरवती के पति की मौत हो गई थी। अगली बार पत्नी ने नियम से व्रत किया तो पति जीवित हो गया।

यह भी कहा जाता है कि पूजा के बाद पति को छलनी से देखने पर पत्नी सारे विचारों और भावनाओं को छानकर शुद्ध कर देती है। करवा का अर्थ मिट्टी का बर्तन होता है। व्रत के दौरान सुहागिन पूजा करके माता की पूजा करती हैं और और पति के लम्बी उम्र की कामना करती है। करवा चौथ में सरगी खाने की परंपरा भी है जो सूरज उगने के पहले खाया जाता है।इस बार चतुर्थी तिथि का आरम्भ 4 बजकर 58 मिनट से शुरू होगा और 9 अक्टूबर की दोपहर 2 बजकर 16 मिनट पर पूरा हो जाएगा। पूजा के दौरान सुहागिन लाल कपड़े पहनती हैं क्योंकि लाल रंग को हिन्दू धर्म में शुभ माना जाता है। चांद देखने के पहले मां गौरी की पूजा करें और भोग जरूर लगाएं तभी पूजा का उचित फल मिलेगा।

 

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